اندھیری رات ہے غم کی گھٹا عصیاں کی کالی ہے
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टाइटल : Falak Ke Nazaro Zameen Ki Baharo [Huzoor Aagaye Hain]
श्रेणी (कटेगरी) : नात के बोल (लीरिक्स)
लेखक/गीतकार : विविध/अज्ञात
नातख्वान/कलाकार: विविध/अज्ञात
जोड़ा गया : 09 Apr, 2023 09:37 AM IST
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फलक के नज़ारों, जमीन की बहारों
सब ईदे मनाओ हुज़ूर आगये हैं
उठो गम के मारो चलो बेसहारों
खबर यह सुनाओ हुज़ूर आगये हैं
हुज़ूर आगये हैं, हुज़ूर आगये हैं
अनोखा निराला वो जीशान आया
वो सारे रसूलों का जीशान आया
अरे कजखुलाओं अरे बादशाहों
निगाहें झुकाओं हुज़ूर आगये हैं
हुज़ूर आगये हैं, हुज़ूर आगये हैं
हुआ चार सु रहमतों का बसेरा
उजाला उजाला, सवेरा सवेरा
हालिम को पहुंची खबर आमीना की
मेरे घर में आओं, हुज़ूर आगये हैं
हुज़ूर आगये हैं, हुज़ूर आगये हैं
हवाओं में जज़्बात हैं मरहबा के
फजाओं में नगमात सल्ले अलाह के
दुरूदों के गजरे, सलामों के तोहफे
गुलामों सजाओं, हुज़ूर आगये हैं
हुज़ूर आगये हैं, हुज़ूर आगये हैं
समा है सना ऐ हबीब ऐ खुद का
यह मीलाद है सरवरे अंबिया का
नबी के गदाओ सब एक दूसरे को
गले से लगाओ, हुज़ूर आगये हैं
हुज़ूर आगये हैं, हुज़ूर आगये हैं
कहाँ मैं ज़हूरी कहाँ उनकी बातें
करम ही करम हैं यह दिन और रातें
जहां पर भी जाओ दिलों को जगाओ
यही कहते जो, हुज़ूर आगये हैं
हुज़ूर आगये हैं, हुज़ूर आगये हैं
फलक के नज़ारों, जमीन की बहारों
सब ईदे मनाओ हुज़ूर आगये हैं
हुज़ूर आगये हैं, हुज़ूर आगये हैं